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Compression member सम्पीडन उपांग

 सम्पीडन उपांग ( Compression member)

किसी संरचना का कोई भी अवयव जिसपर सम्पीडन बल लगता है। सम्पीडन उपांग कहलाता है। इस बल के कारण उपांग की लम्बाई में कमी आती है। 

सम्पीडन उपांगो के प्रकार (Type of compression member)

1) स्ट्रट ऐसा सम्पीडन उपांग  जहां भार अनुदैर्घ्य अक्ष के संकेंद्रित कार्य करता है। 

2) स्तंभ , खम्भा या पोस्ट 

बिल्डिंग में ऊर्ध्वाधर सम्पीडन उपांग को स्तम्भ ,खम्भा या पोस्ट कहते है। 

सम्पीडन उपांगो की प्रभावी लम्बाई 

प्रभावी लम्बाई स्तम्भ की वास्तविक लम्बाई और उनके सिरों की स्थिति के अनुसार निर्धारित होती है।

प्रभावी लम्बाई Le = KL 

जहां Le= सम्पीडन उपांग की प्रभावी लम्बाई 

       K= प्रभावी लम्बाई गुणांक 

       L= सम्पीडन उपांग की वास्तविक लम्बाई 


घूर्णन त्रिज्या (Radius of Gyration) 

घूर्णन त्रिज्या को r से प्रदर्शित करते है। 

                       r=√l/A 

जहां I = खण्ड का जडत्व अघूर्ण हैं 

      A= खण्ड का काट क्षेत्र 

तनुता अनुपात( Slenderness Ratio)

सम्पीडन उपांग की प्रभावी लम्बाई एवं न्यूनतम परिभ्रमण के अनुपात को तनुता से परिभाषित करते है इसे λ से प्रदर्शित करते है

          λ   = प्रभावी लम्बाई ( l ) / न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या 

          

अधिकतम तनुता अनुपात  λ  
1- अचल भार और अध्यारोपित भार के कारण आने वाले भार वहन करने वाले उपांग=180 

2 जो केवल वायु और भूकंप बलो के फलस्वरूप भार वहन करते है।= 250  
3 जो सामान्यत: छत कैंची या बंधन व्यवस्था में तनन उपांग के रूप में कार्य करते है = 350 


उपांगो के प्रकार (Types of section) 
संपीडन उपांग के विभिन्न काट या तो एकल कोणीय खण्ड अथवा उनके सम अथवा विषम कोणीय खण्डो के जोड़ हो सकते है। 
 
व्याकुंचन के प्रकार 
1)आनमन व्याकुंचन ( Flexural buckling) 
ये एक विचलन है जो अधिकतम तनुता अनुपात के सापेक्ष अक्ष पर तन्यता के कारण व्युत्पन्न होता है।ये न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या के सापेक्ष कमतर अक्ष के अनुरूप है। किसी भी प्रकार के खण्ड विन्यास सम्पीडन उपाग मे इसी तरह असफल होते है 
2) घूर्णन व्याकुंचन ( torsional buckling) 

ये केवल बंकन की वजह से है, इसमें काट अपनी मूल अवस्था से रूपांतरण बिना घूर्णन की स्थापना के कारण होता है।घूर्णन व्याकुंचन जब उपांग की घूर्णन दृढ़ता बंकन दृढ़ता अपेक्षाकृत कम होती है।इस तरह की विफलता उपांग के अनुदैधर्य  अक्ष के सापेक्ष मरोड़ के कारण होती है।  

स्तम्भ सूत्र (Column formula) 

आयलर सूत्र ( Eular formula) 

आयलर सूत्र  के अनुसार किसी स्तम्भ का भार निम्न सूत्र के अनुसार निकाला जाता है।

          P= π^2EI/L^2 

आयलर सूत्र  की सूत्र की परिसीमाएं ( Limitation of Eular's Formula) 

1- ये छोटे एवं पतले सम्पीडन उपांग के संदर्भ में विश्वनीय परिणाम नहीं देता है। 

सम्पीडन उपांग की सामर्थ्य ( Strength of Compression Members) 

वह भार क्षमता जो स्तंभ के तनुता अनुपात के सापेक्ष सुरक्षित सम्पीडन बल के कारण होती है। 

निम्न सुत्र से उपांग की सामर्थ्य ज्ञात की जा सकती है।

                    P= Ae x σac 

    P= सम्पीडाग की सामर्थ्य 

    Ae= प्रभावी काट का क्षेत्रफल 

   σac= अक्षीय सम्पीडन मे अनुज्ञेय प्रतिबल सामर्थ्य ज्ञात करने हेतु 

सम्पीडन उपांग की चरणबद्ध प्रक्रिया 

चरण 1 -

सिरो की स्थिति के अनुसार उपांग की प्रभावी लम्बाई Le ज्ञात कीजिए।

चरण 2 

इस्पात तालिका काट का सकल खण्ड क्षेत्रफल ज्ञात करे 

चरण 3 

मुख्य अक्ष के सापेक्ष उपाग की परिभ्रमण त्रिज्या rmin ज्ञात करे यदि कोणीय खण्ड एकल हो तो इसका मान इस्पात तालिका मे उपलब्ध रहता है, यदि द्वि कोणीय खण्ड हो तो x x एवं Y Y के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करे न्यूनतम जड़त्व आघूर्ण के लेते हुए न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या निम्न सम्बन्ध से ज्ञात करे। 

             r min = √Imin/A 

चरण 4 

अधिकतम तनुता अनुपात ज्ञात करे 

              λ max= Le/rmin 

  λ max = अधिकतम तनुता अनुपात 

           Le= प्रभावी लम्बाई 

           rmin= न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या 

चरण 5 

    तालिका से σac की गणना करे 

चरण 6 

  अन्त में सामर्थ्य P= Ae x σac 

सतत उपांग( Continous Member) 

जब बहुत से उपांग मिल कर कोई खण्ड बनाते है तो उसे सतत सदस्य कहा जाता है।

सतत उपांग की प्रभावी लम्बाई = 0.7L से 1.0L तक होती है। 

सम्पीडन प्रतिबल= σac

असतत उपांग( Discontinous Member) 

वह उपांग जो जोड़ो पर सतत न हो उसे असतत उपांग कहते है। असतत उपांग या तो एकल या द्वि कोणीय हो सकते है। 

1- जब एकल कोणीय असतत एक कीलक से जुड़ा हो 

a)असतत उपांग की प्रभावी लम्बाई Le=L 

b)सम्पीडन प्रतिबल= 0.8 σac 

c)तनुता अनुपात का मान = 180 से अधिक नही होनी चाहिए।


2 जब एकल कोणीय असतत स्ट्रट दो या दो से अधिक कीलक से जुड़ा हो या वेल्डेड हो 

a) प्रभावी लम्बाई Le= 0.85L 

b)सम्पीडन प्रतिबल=  σac 

अक्षीय भारित सम्पीडन उपाग का अभिकल्पन( Design of Axially loaded Compression Member) 

मान्यताऍ 

1- आदर्श स्तंभ पूर्णत: सीधा माना जाता है। जिसमे ऐठन न हो जो व्यवहारिक रूप से संभव नही है ।

2- संघटित स्तंभ प्रत्यास्थता गुणाक स्थिर माना जाता है 

3- माध्यमिक प्रतिबल जो प्राथमिक प्रतिबल मान 25% से 40% की श्रेणी में होते है उसे नगण्य मानते है। 

अभिकल्पन की प्रक्रिया 

चरण 1- σac का मान 

 (i) कोणीय खण्ड के लिए 80 N/mm2

  (ii) bellet वेल्लित इस्पात कड़ी के लिए 100N/mm2

(iii) संघटित खण्ड के लिए 140 N/mm2 

चरण 2- 

सकल काट क्षेत्रफल की गणना करे Ag = भार/ σac 

चरण 3- 

इस्पात तालिका से एक परिक्षण खण्ड का चयन , आपेक्षित सकल काट क्षेत्रफल के अनुसार करे।

चरण 4 

न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या इस्पात तालिका से परीक्षण खण्ड के लिए ज्ञात करना न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या rxx, ryy व rvv में से न्यूनतम होगी ।

चरण 5 

सिरे की स्थिति के अनुसार उपांग के प्रभावी लम्बाई की गणना करे। यदि सिरे की स्थिति स्पष्ट न हो तो कोई स्थिति मान ले।

चरण 6 

वास्तविक तनुता अनुपात निकाले 

         λ= प्रभावी लम्बाई/ न्यूनतम परिभ्रमण त्रिज्या 

चरण 7

λ के आधार पर  σac और fy निकाले 

चरण 8 

माने गए परिक्षण खण्ड का सुरक्षित भार वहन क्षमता ज्ञात करे 

       भार वहन क्षमता = σac x खण्ड का क्षेत्रफल 

चरण 9 

सुरक्षित भार वहन क्षमता दिए गए भार के बराबर या उससे अधिक होनी चाहिए ।तभी चयनित खण्ड को ले ।अन्यथा अन्य खण्ड का परिक्षण करे।

चरण 10

प्रयुक्त खण्ड का तनुता अनुपात की जांच करे ,इसका मान तालिका में दिए निर्धारित मान से अधिक नहीं होना चाहिए ।



संघटित स्तम्भ ( जालक स्तम्भ) Built up Column  (Latticed Column) 

जब किसी विशिष्ट आकृति या बड़े परिभ्रमण त्रिज्या की आवश्यकता दो दिशाओं में पड़े, तो एक संयोजी खण्ड का निर्माण करते है। 

भारी भरकम भारित लंबे स्तंभ के मितव्ययी अभिकल्पन के लिए स्तंभ खण्ड की न्यून्यतम परिभ्रमण त्रिज्या को बढ़ा कर अधिकतम ryy≥ rzz कर दिया जाता है।





Comments

  1. Nice & thank you sir...... ,

    Figure clear nhi hai

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by the author.

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