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Showing posts from April, 2021

Chaining on sloping ground

  Chaining on Sloping Ground (Simple Notes) When measuring distances on a hill or slope, we always need to find the flat horizontal distance , not the actual sloped ground distance. There are two main ways to do this: 1. Direct Method (Stepping Method) In this method, you measure the flat horizontal distance directly on the field by creating small, flat steps. Best For: Short, bumpy, irregular, or gentle slopes. How it works (Step-by-Step): Start: The Follower holds the 0-end of the tape flat on the starting ground point A. Stretch: The Leader pulls a short, comfortable length of the tape forward and lifts it up until it looks perfectly flat and straight by eye judgment. Drop: Because the front end of the tape is hanging in the air, the Leader drops a plumb-bob (a weight on a string) down to find the exact vertical point on the ground. Mark & Repeat: They stick an arrow into that ground point. The Follower moves to this new arrow, and they repeat the steps all the way u...

Part 4 Failure of rivet joint,रिवेट जोड़ो की विफलता

  रिवेट जोड़ो की विफलता  रिवेट जोड़ की विफलता  तीन प्रकार से हो सकती है। 1 तनन विफलता  2 अपरुपण् विफलता  3 धारण विफलता  (1) तनन विफलता (Tensile failure) तनन में विफलता प्लेट के फटने के कारण होती है। जब प्लेट पर तनन बल प्लेट की क्षमता से अधिक लगेगा तो प्लेट रिवेटो के बीच से फट जाएगी और जोड़ टूट जायेगा। इस प्रकार की विफलता को तनन विफलता कहते है।  नोट   जब किसी प्लेट को बाहर की तरफ तनन बल से खींचा जाता है।तो पहले प्लेट उस बल का विरोध  करती है। परन्तु प्लेट की क्षमता से अधिक बल लगाने पर प्लेट फटने लगने है। प्लेट वहा से सबसे पहले फटती है जहा पर जो सबसे अधिक कमजोर होती है। चुंकि प्लेट में रिवेट लगाते समय प्लेट में छिद्र किया जाता है ।जिससे छिद्र की लाइन में प्लेट की धातु कम हो जाती हैं । और प्लेट रिवेट के बीच से आसानी से फट जाती है। इसी कारण जब प्लेट के फटने के स्थान की लंबाई निकालते है तो उसमे से प्लेट के होल को घटा देते है अर्थात (p -d) जैसा कि नीचे दिखाया गया है। माना प्लेट द्वारा वहन किया जाने वाला अधिकतम बल P t  हैं । तब  P...

Part 3 संरचनात्मक इस्पातीय जोड़, रिवेट जोड़

  रिवेट जोड़ (Rivet joint) Rivet स्टील स्ट्रक्चर के उपांगो को जोड़ने का एक पुराना तरीका जिसे अब प्रयोग में नही किया जाता है। परन्तु पुरानी संरचना की मरम्मत तथा देखभाल के लिए इसे पढ़ना जरूरी हो जाता है। रिवेट इस्पात की एक गोल कील होती है।जिसका एक सिरा  मोटा बनाया जाता है,जिसे शीर्ष कहा जाता है।और बाकी के भाग को शैंक कहा जाता है।  रिवेटो का वर्गीकरण classification of rivets  (1) लगाए जाने वाली विधि की अनुसार  (2) लगाने के स्थान व शक्ति के प्रयोग के अनुसार  (1) लगाए जाने वाली विधि की अनुसार  (a) गर्म करके लगाए जाने वाले रिवेट. (b) ठंडी अवस्था में लगाए जाने वाले रिवेट. (2) लगाने के स्थान व शक्ति के प्रयोग के अनुसार  (a) हस्त चालित रिवेट  (b) शक्ति चालित रिवेट  (c) शक्ति चालित शॉप रीवेट  रिवेट जोड़ो के प्रकार types of joints (1) लैप जोड़  (2) बट या टक्करी जोड़  (1) लैप जोड़ Lap joint इसमें दो प्लेटो को एक दूसरे के ऊपर रखकर रिवेट द्वारा जोड़ा जाता है। ये निम्न प्रकार का होता है  (a)एकल रिवेट लैप जोड़ इसके रिवेटो की केव...

इस्पात भाग २

 भार (loads) संरचना पर निम्न प्रकार का भार आ सकता है। अचल भार  चल भार  पवन भार भूकम्प भार  हिम भार  अचल भार  इसमें संरचना का स्वयंम का भार तथा ऐसा भार जो स्थाई हो आता है। इसके साथ साथ संरचना में जुड़े सभी अवयवों का भार सम्मिलित होता है। चल भार   ऐसा भार जिसका मान बदलता रहता है।उसे चल भार कहते है। जैसे संरचना पर स्टोर की गई अस्थाई वस्तुओ का भार आदि। पवन भार  पवन भार संरचना की ऊंचाई उसकी भौगोलिक स्थिति ,पवन का वेग, तथा पवन की दिशा पर निर्भर करता है। हिम भार   ऐसे स्थानों पर जहां हिमपात अधिक होता है। वहा इस भार को संरचना के डिजाइन में सम्मिलित किया जाता है। भूकम्प भार  जहा भूकंप आने की संभावना होती है।वहा पर इस भार पर भी विचार किया जाता है।  धरने  (Beam) धरन ये एक संरचना का भाग होता है। जिस पर लगने वाला बल धरन के अनुदैध्य अक्ष के नत होते है। धरने निम्न प्रकार की होती है। (1) शुद्धलम्ब धरन (Simply supported Beam) (2) प्रलम्ब धरन (Over Hang Beam) (3) प्रास धरन (Cantilever Beam) (4) आबद्ध धरन (Fixed Beam) (5) सतत धरन (Continuous Beam...

Steel section, part 1इस्पातीय खण्ड

  संरचनात्मक इस्पात   संरचनात्मक इस्पात में मुख्य घटक लोहा होता है।इसके साथ साथ कुछ पदार्थो को इसमें मिलाया जाता है। जिससे इसके तनन क्षमता तथा तन्यता मे सुधार किया जा सके। इस्पात में कार्बन की मात्रा लगभग 0.15% होती है। मृदु इस्पात (mild steel) मे कार्बन की मात्रा 0.15% से 0.30% होती है। मृदु इस्पात में तन्यता होती है, इसी कारण इसे अलग अलग खण्डो में बेल्लित किया जा सकता है। संरचनात्मक इस्पात के गुण   भौतिक गुण  (1) घनत्व(Density)- 78.5 kN/m^3 (7.85 gm/cc)(7850 Kg/m^3)  (2) रेखीय प्रसार गुणांक (Co-efficient of linear expansion)- 2.04x10^5 से 2.18x10^5 N/mm^2  (3) दृढ़ता मापांक (Modulus of Rigidity) 0.84x10^5 से 0.98x10^5 N/mm^2  रासायनिक संघटन (Chemical composition) कार्बन C -0.02% मैगनीज Mn - 0.05%  सल्फर S  0.005%  फास्फोरस P - 0.005%  सिलिकॉन Si -0.03%  कॉपर Cu - 0.03%   इस्पतीय खण्ड  अभिकल्पन की सुविधा के लिए मृदु इस्पात के बेल्लित संरचनात्मक खण्डो को विभिन्न आकारों में बनाया गया है।जो निम्न है। 1 बेल्लित इस...