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Contour (कॉन्टूर) क्या है? | Types, Uses, Importance of Contour in Surveying – Civil Engineering Notes in Hindi

 

Contour क्या होता है

कॉनटूर (Contour) शब्द का प्रयोग सर्वेक्षण (Surveying) में बहुत आम है।
यह शब्द जमीन की ऊँचाई और ढाल (slope) को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कॉनटूर लाइनों की मदद से हम किसी इलाके की सतह (surface) को 3-D रूप में समझ सकते हैं — यानी बिना उस जगह पर जाए यह पता लगाया जा सकता है कि जमीन ऊँची है या नीची।


 कॉनटूर की परिभाषा (Definition of Contour)

कॉनटूर (Contour) एक काल्पनिक रेखा (Imaginary Line) होती है जो उन सभी बिंदुओं (points) को जोड़ती है जिनकी ऊँचाई (elevation) समुद्र तल (mean sea level) से बराबर होती है

उदाहरण:
अगर किसी क्षेत्र में 100 मीटर ऊँचाई वाले सारे बिंदुओं को जोड़ दिया जाए, तो वह रेखा 100 मीटर की कॉनटूर लाइन कहलाएगी।
इसका मतलब यह कि उस लाइन पर आने वाले हर बिंदु की ऊँचाई 100 मीटर है।


कॉनटूर का उद्देश्य (Purpose of Contour Map)

कॉनटूर लाइनों का मुख्य उद्देश्य है —
जमीन के प्राकृतिक आकार (shape) और ढाल को दिखाना ताकि इंजीनियर और सर्वेयर उस क्षेत्र की सही योजना बना सकें।

मुख्य उद्देश्य:

  1. जमीन के आकार और ढाल को समझना।

  2. सड़कों, नहरों, भवनों, बांधों आदि के निर्माण में मदद करना।

  3. खुदाई (cutting) और भराई (filling) की मात्रा निकालना।

  4. जल प्रवाह (drainage) की दिशा जानना।

  5. किसी इलाके का नक्शा बनाना।

  6. बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण योजनाओं में उपयोग।


 महत्वपूर्ण शब्द (Important Terms in Contour)

शब्दअर्थ
कॉनटूर लाइन (Contour Line)समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखा
कॉनटूर इंटरवल (Contour Interval)दो कॉनटूर लाइनों के बीच की ऊँचाई का अंतर
हॉरिजॉन्टल इक्विवेलेंट (Horizontal Equivalent)दो कॉनटूर लाइनों के बीच की क्षैतिज दूरी
इंडेक्स कॉनटूर (Index Contour)हर पाँचवीं कॉनटूर लाइन जिसे मोटा खींचा जाता है ताकि नक्शा आसानी से पढ़ा जा सके
आर.एल. (Reduced Level)किसी बिंदु की ऊँचाई समुद्र तल से कितनी है

कॉनटूर की विशेषताएँ (Characteristics of Contour Lines)

  1. एक ही कॉनटूर लाइन पर सभी बिंदु समान ऊँचाई के होते हैं।

  2. दो कॉनटूर लाइने कभी एक-दूसरे को काटती नहीं हैं (सिवाय खड़ी चट्टानों के)।

  3. कॉनटूर लाइनें हमेशा बंद लूप (closed loop) बनाती हैं — चाहे नक्शे के अंदर या बाहर।

  4. जहाँ कॉनटूर लाइनें एक-दूसरे के बहुत पास हों, वहाँ ढाल तेज़ (steep) होती है।

  5. जहाँ लाइने दूर-दूर हों, वहाँ ढाल हल्की (gentle) होती है।

  6. घाटियों (valley) की दिशा “V” आकार में होती है जो ऊँचाई की तरफ खुलती है।

  7. पहाड़ी (hill) क्षेत्र में कॉनटूर गोल घेरा बनाती हैं।


 कॉनटूर की विधियाँ (Methods of Contouring)

कॉनटूर लाइनें बनाने के दो मुख्य तरीके हैं:


 1. डायरेक्ट मेथड (Direct Method)

इस विधि में सर्वेक्षक (survey engineer) जमीन पर ही बराबर ऊँचाई वाले बिंदुओं को ढूंढता है और उन्हें जोड़कर कॉनटूर बनाता है।

फायदे:

  • बहुत सटीक (accurate) परिणाम देता है।

नुकसान:

  • समय ज्यादा लगता है।

  • छोटे क्षेत्र (small area) के लिए ही उपयुक्त है।

उपयोग:
भवन स्थल (building site), बांध स्थल (dam site) आदि में।


 2. इनडायरेक्ट मेथड (Indirect Method)

इस विधि में पूरे क्षेत्र की ऊँचाई के कई बिंदु मापे जाते हैं और बाद में ऑफिस में नक्शे पर कॉनटूर खींचे जाते हैं।

(a) ग्रिड मेथड (Grid Method):

क्षेत्र को छोटे-छोटे चौकोर हिस्सों (5m×5m या 10m×10m) में बाँटा जाता है।
हर कोने की ऊँचाई मापी जाती है और समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़कर कॉनटूर बनाई जाती है।

(b) क्रॉस-सेक्शन मेथड (Cross Section Method):

सड़क, नहर या रेलवे लाइन के दोनों ओर क्रॉस-सेक्शन लिए जाते हैं और कॉनटूर लाइने खींची जाती हैं।

(c) टैचीओमेट्रिक मेथड (Tacheometric Method):

इसमें टैचीओमीटर (Tacheometer) यंत्र से दूरी और ऊँचाई मापी जाती है।
यह विधि पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्रों में उपयोगी है।


 कॉनटूर इंटरवल (Contour Interval)

कॉनटूर इंटरवल का मतलब है — दो लगातार कॉनटूर लाइनों के बीच की ऊँचाई का अंतर।

उदाहरण:
अगर 100 मीटर और 105 मीटर की दो कॉनटूर लाइने हैं,
तो कॉनटूर इंटरवल = 5 मीटर

यह किन बातों पर निर्भर करता है:

  1. जमीन का स्वभाव:
    खड़ी जमीन (steep slope) में इंटरवल बड़ा रखा जाता है,
    समतल जमीन में छोटा।

  2. नक्शे का पैमाना (Scale):
    बड़ा पैमाना → छोटा इंटरवल।

  3. सर्वेक्षण का उद्देश्य:
    विस्तृत अध्ययन के लिए छोटा इंटरवल बेहतर।


 कॉनटूर मैप पढ़ने का तरीका (How to Read Contour Map)

कॉनटूर नक्शा देखने और समझने के कुछ आसान नियम 👇

स्थितिमतलब
कॉनटूर लाइने पास-पासढाल तेज
कॉनटूर लाइने दूर-दूरढाल हल्की
बंद गोल कॉनटूर जिनकी ऊँचाई बीच में बढ़ती हैपहाड़ी क्षेत्र
बंद कॉनटूर जिनकी ऊँचाई बीच में घटती हैगड्ढा या depression
“V” आकार की कॉनटूरघाटी (Valley)
“U” आकार की कॉनटूरपहाड़ी Ridge
 कॉनटूर मैप के उपयोग (Uses of Contour Map)

कॉनटूर मैप का उपयोग बहुत से क्षेत्रों में किया जाता है 👇

  1. ढाल और ऊँचाई का पता लगाने के लिए

  2. सड़क, नहर और रेलवे लाइन की योजना

  3. जल प्रवाह की दिशा जानने के लिए

  4. बांध और जलाशय (Reservoir) बनाने के लिए

  5. खुदाई और भराई की मात्रा निकालने के लिए

  6. टाउन प्लानिंग (Town Planning)

  7. बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी व्यवस्था (Drainage Planning)


 कॉनटूर सर्वेक्षण के उपकरण (Instruments Used)

कॉनटूर सर्वे के लिए निम्न उपकरणों का प्रयोग होता है:

  1. ऑटो लेवल या डंपी लेवल (Auto Level / Dumpy Level)

  2. लेवल स्टाफ (Leveling Staff)

  3. टैचीओमीटर (Tacheometer)

  4. प्लेन टेबल और कम्पास (Plane Table and Compass)

  5. टेप या चेन (Tape/Chain)

  6. ड्राइंग शीट, स्केल और पेंसिल


 कॉनटूर से बनने वाले स्थलरूप (Landforms Represented by Contours)

स्थलरूपकॉनटूर की बनावट
पहाड़ी (Hill)बंद गोल कॉनटूर जिनकी ऊँचाई बीच में बढ़ती है
घाटी (Valley)“V” आकार की कॉनटूर जो ऊँचाई की तरफ खुलती हैं
रिज (Ridge)लंबी ऊँची पट्टी के रूप में कॉनटूर
गड्ढा (Depression)बंद कॉनटूर जिनमें अंदर की ओर छोटी रेखाएँ बनी हों
खड़ी चट्टान (Cliff)कॉनटूर लाइनें बहुत पास-पास या एक-दूसरे को काटती हुई

 कॉनटूर मैप के फायदे (Advantages of Contour Map)

  1. जमीन के 3-D स्वरूप को समझना आसान।

  2. ढाल और दिशा का स्पष्ट ज्ञान।

  3. निर्माण कार्य (Construction) की योजना आसान।

  4. जल निकासी और सिंचाई व्यवस्था बनाना सरल।

  5. खुदाई और भराई की गणना सरल।

  6. बाढ़ और जल प्रवाह के अध्ययन में मददगार।


 कॉनटूर की सीमाएँ (Limitations of Contour Map)

  1. इसे तैयार करने में अधिक समय लगता है।

  2. उच्च सटीकता के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति आवश्यक।

  3. समतल क्षेत्र में ढाल पहचानना कठिन।

  4. माप में छोटी गलती से बड़ा अंतर आ सकता है।


 एक आसान उदाहरण

मान लीजिए किसी इलाके में 100m, 105m, 110m, 115m की कॉनटूर लाइने बनी हैं।
इसका अर्थ है:

  • हर लाइन के बीच 5 मीटर का ऊँचाई अंतर है।

  • जहाँ लाइनें पास-पास हैं, वहाँ ढाल तेज है।

  • जहाँ लाइनें दूर-दूर हैं, वहाँ ढाल हल्की है।

इस तरह कॉनटूर लाइनों से हम किसी भी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और ढाल को समझ सकते हैं।


 कॉनटूर का वास्तविक उपयोग (Practical Applications)

  1. सड़क और राजमार्ग निर्माण (Road & Highway Design)

  2. नहर और सिंचाई परियोजनाएँ (Irrigation Projects)

  3. जलाशय और बांध योजना (Reservoir & Dam Design)

  4. शहर योजना (Urban Planning)

  5. खनन कार्य (Mining Projects)

  6. रेलवे ट्रैक डिजाइन (Railway Alignment)

  7. जल प्रवाह नियंत्रण और नाला योजना (Drainage Design)


 निष्कर्ष (Conclusion)

कॉनटूर सर्वेक्षण इंजीनियरिंग की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है।
इससे हमें जमीन का तीन-आयामी (3-D) दृश्य बिना खुदाई किए प्राप्त होता है।
यह सड़क, नहर, बांध, जल निकासी प्रणाली और इमारतों की सही योजना बनाने में अत्यंत उपयोगी है।

सरल शब्दों में:

“कॉनटूर वह रेखा है जो समान ऊँचाई वाले बिंदुओं को जोड़ती है, जिससे हमें किसी क्षेत्र की ढाल और आकृति का पता चलता है।”

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