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Soil Mechanics in Civil Engineering | Shear Strength, Angle of Repose, Coulomb’s Law Explained in Hindi

 

Shear Strength of Soil क्या होती है? 

👉 Shear Strength (कतरनी शक्ति) का मतलब होता है —
मिट्टी की वह क्षमता जिससे वह फिसलने (Slip) या टूटने (Failure) से खुद को रोकती है।

यानि जब मिट्टी पर कोई भार (load) या दबाव (pressure) आता है,
तो वह या तो टिके रहती है (Stable)
या खिसक जाती है (Failure)।
मिट्टी के खिसकने से बचने की क्षमता ही उसकी Shear Strength कहलाती है।


उदाहरण से समझो:

मान लो दो ढेर मिट्टी के हैं —

  1. सूखी रेतीली मिट्टी

  2. गीली चिकनी मिट्टी

  • अगर आप सूखी रेतीली मिट्टी पर पैर रखो तो वो फौरन फिसल जाती है — यानी उसकी shear strength कम है।

  • लेकिन अगर वही मिट्टी थोड़ी गीली हो जाए तो थोड़ी चिपकने लगती है — यानी उसकी shear strength बढ़ जाती है


मिट्टी में Shear Strength कहाँ काम आती है:

  1. नींव (Foundation) को भार सहने में

  2. ढलानों (Slopes) या पहाड़ियों को फिसलने से रोकने में

  3. Retaining wall के पीछे मिट्टी को थामे रखने में

  4. Roads, embankments, dams आदि के डिज़ाइन में


Shear Strength किन बातों पर निर्भर करती है:

  1. Cohesion (चिपकने की शक्ति)
    मिट्टी के कणों के बीच चिपकने की क्षमता।
    यह खासकर चिकनी मिट्टी (Clay) में ज्यादा होती है।

  2. Internal friction (आंतरिक घर्षण कोण φ)
    जब मिट्टी के कण एक-दूसरे पर फिसलते हैं तो जो रगड़ होती है,
    वही उसकी आंतरिक घर्षण कहलाती है।
    यह रेतीली मिट्टी में ज्यादा होती है।


Shear Strength का सूत्र (Mohr–Coulomb Equation):

τ=c+σtanϕ\tau = c + \sigma \tan\phi

जहाँ,

  • τ = Shear strength (कतरनी शक्ति)

  • c = Cohesion (चिपकने की शक्ति)

  • σ = Normal stress (सामान्य दबाव)

  • φ = Angle of internal friction (आंतरिक घर्षण कोण)


मुख्य बातें याद रखने योग्य:

प्रकारप्रमुख कारणउदाहरण
Cohesive strengthमिट्टी के कणों की चिपकने की प्रवृत्तिClay soil
Frictional strengthकणों के बीच रगड़Sand soil

Shear Strength निकालने के प्रयोग (Tests):

  1. Direct Shear Test – सबसे आसान और सामान्य टेस्ट

  2. Triaxial Compression Test – सटीक और आधुनिक तरीका

  3. Unconfined Compression Test (UCC) – केवल Clay के लिए

  4. Vane Shear Test – Soft clay के लिए (Field test)


निष्कर्ष (Conclusion):

मिट्टी की Shear Strength बताती है कि
वह भार, दाब या बल लगने पर फिसलेगी या स्थिर रहेगी
यह मिट्टी की स्थिरता (stability), ढलान, नींव और संरचनाओं की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण गुण है। 

मिट्टी की shear strength के दो मुख्य घटक (components) होते हैं —

  1. Cohesion (c)
    Cohesion वह बल है जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर रखता है। यह खासकर clay soil (चिकनी मिट्टी) में पाया जाता है। Cohesion मिट्टी को मजबूती देता है, जिससे वह बिना टूटे कुछ भार सह सकती है।

  2. Internal Friction (ϕ)
    यह वह घर्षण है जो मिट्टी के कणों के बीच उनके संपर्क से उत्पन्न होता है। यह बल sandy soil (रेतीली मिट्टी) में ज़्यादा होता है। जब मिट्टी पर लोड लगता है तो कण एक-दूसरे पर फिसलने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह friction उन्हें रोकता है।

👉 इसलिए कुल shear strength (τ) का सूत्र होता है:
τ = c + σ tanϕ
जहाँ σ = normal stress, c = cohesion, और ϕ = angle of internal friction.

इस प्रकार, cohesion और internal friction — मिट्टी की shear strength के दो सबसे महत्वपूर्ण घटकl 

 सिविल इंजीनियरिंग में shear strength के मुख्य उपयोग 


फाउंडेशन डिज़ाइन (Foundation Design) –

किसी भी बिल्डिंग या पुल की नींव (foundation) बनाने से पहले यह जांचना ज़रूरी है कि नीचे की मिट्टी कितनी मजबूत है। Shear strength से पता चलता है कि मिट्टी foundation के भार को झेल सकती है या नहीं।


ढलानों की स्थिरता (Slope Stability) –

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें, डैम या कटिंग बनाते समय slope के फिसलने (landslide) का खतरा होता है। Shear strength यह तय करने में मदद करती है कि ढलान सुरक्षित है या नहीं।

Retaining Wall Design (रिटेनिंग वॉल डिज़ाइन) –

Retaining wall के पीछे की मिट्टी दबाव डालती है। उस मिट्टी की shear strength जानकर ही दीवार की मोटाई और मजबूती तय की जाती है।

Roads और Embankments (सड़कें व बांध) –

मिट्टी की strength देखकर तय किया जाता है कि वह सड़क या बांध का भार सह पाएगी या नहीं। 

विश्राम कोण (Angle of Repose)

विश्राम कोण वह अधिकतम कोण है जिस पर कोई ढीली मिट्टी, रेत या अन्य दानेदार पदार्थ खुद-ब-खुद फिसले बिना ढेर बनाकर टिक सकता है।

 सरल भाषा में:

जब आप रेत या मिट्टी का ढेर बनाते हैं, तो वह ढेर किसी स्थिर झुकाव (slope) पर टिकता है। उस झुकाव का कोण ही विश्राम कोण कहलाता है।

मुख्य बातें:

यह कोण मिट्टी या रेत के प्रकार पर निर्भर करता है।

रेत (Sand) ≈ 30°–35°

चिकनी मिट्टी (Clay) ≈ 15°–25°

यह material की स्थिरता बताता है।

सिविल इंजीनियरिंग में उपयोग:

ढलानों (Slopes) की सुरक्षा

Embankments और Retaining walls डिजाइन

विश्राम कोण जितना बड़ा, सामग्री उतनी ही स्थिर होती है। 

Coulomb’s Law in Soil Mechanics (कूलॉम का नियम – मिट्टी यांत्रिकी में)

Soil Mechanics में Coulomb’s Law का प्रयोग मिट्टी की shear strength (कतरनी ताकत) समझाने के लिए किया जाता है।

👉 Coulomb ने बताया था कि जब मिट्टी पर कोई भार लगता है, तो वह दो ताकतों की वजह से टूटती या फिसलती है —

  1. Cohesion (c) – मिट्टी के कणों का आपसी जुड़ाव

  2. Friction (ϕ) – कणों के बीच का घर्षण

Coulomb के अनुसार, मिट्टी की कुल shear strength (τ) इन दोनों पर निर्भर करती है।

सूत्र:

τ=c+σtanϕ\tau = c + \sigma \tan \phi

जहाँ —

  • τ (Tau) = कुल shear strength

  • c = Cohesion

  • σ (Sigma) = Normal stress (ऊपर से लगने वाला दबाव)

  • ϕ (Phi) = Internal friction angle


💡 सरल शब्दों में:
Coulomb ने कहा कि मिट्टी की ताकत दो चीज़ों पर निर्भर करती है —

  • मिट्टी के कण कितने जुड़े हैं (Cohesion),

  • और वे एक-दूसरे पर कितना रगड़ पैदा करते हैं (Friction)।

यानी जब तक ये दोनों बल मिट्टी में मौजूद हैं, मिट्टी आसानी से नहीं फिसलेगी या टूटेगी।

 कूलम्ब का संशोधित नियम 
टरजागी ने 1936 मे कूलम्ब के नियम में  संसोधन किया , क्योंकि कूलम्ब के सिद्धान्त से सरचनाओ मे विफलता आ जाती है। 

Coulomb का संशोधित नियम — Terzaghi के अनुसार (In Soil Mechanics)

🔹 पृष्ठभूमि (Background):

Coulomb ने सबसे पहले shear strength (कतरनी बल) को समझाने के लिए अपने सिद्धांत का उपयोग किया था।
लेकिन बाद में Karl Terzaghi ने इसे मिट्टी (soil) के लिए संशोधित किया, क्योंकि मिट्टी एक ठोस पदार्थ नहीं बल्कि frictional + cohesive material होती है।


⚙️ Terzaghi का संशोधित नियम (Modified Coulomb’s Equation):

τ=c+σtanϕ\tau = c + \sigma \tan \phi

जहाँ,

  • τ\tau = shear strength (कतरनी बल)

  • cc = cohesion (संयोजन बल)

  • σ\sigma = normal stress (सामान्य तनाव)

  • ϕ\phi = angle of internal friction (आंतरिक घर्षण कोण)


🧠 Terzaghi का संशोधन क्या था?

  1. Coulomb ने सिर्फ घर्षण (friction) को ध्यान में रखा था।

  2. Terzaghi ने मिट्टी में मौजूद cohesion (संयोजन बल) को भी शामिल किया।

  3. इस तरह उन्होंने बताया कि मिट्टी की shear strength दो भागों से मिलकर बनती है —

    • Cohesion (c)

    • Frictional resistance (σ tan φ)


🌾 Terzaghi का Coulomb Theory में सुधार:

CoulombTerzaghi
केवल घर्षण बल को मानता हैCohesion + Friction दोनों को मानता है
Dry sand के लिए ठीकClay और cohesive soil के लिए भी लागू
Purely theoreticalExperimentally verified

📘 Short Exam-Oriented Definition:

“Terzaghi ने Coulomb के shear strength नियम को संशोधित कर बताया कि मिट्टी की कुल कतरनी शक्ति (Shear Strength) उसके संयोजन बल (C) और आंतरिक घर्षण कोण (φ) पर निर्भर करती है।”


✍️ Final Formula (Exam Point):

τ=c+σtanϕ\boxed{\tau = c + \sigma \tan \phi}

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