Skip to main content

Civil Engineering Jobs in Canada: Process, P.Eng License & Cost of Living

  Moving to Canada as a Civil Engineer: Job Market, Process, Salary, and Cost of Living (2026 Guide) Canada is currently undergoing a massive infrastructure boom, making it one of the most attractive destinations globally for skilled professionals. Driven by rapid population growth, the Canadian government is heavily investing in expanding roads, bridges, public transit systems, and sustainable housing solutions.  If you are a civil engineer looking to relocate, Canada offers incredible opportunities, but navigating the immigration and licensing system requires a clear strategy. Here is a realistic breakdown of the pros, cons, application processes, financial expectations, and potential savings. The Pros and Cons of Working in Canada The Good (Pros) High Demand: Civil engineers are consistently listed under Canada’s high-demand occupations. Provinces like Ontario, British Columbia, and Alberta are leading the chart in massive infrastructure developments.   Path to Perman...

उत्तरवर्ती मुगल

 उत्तरवर्ती मुगल 

बहादुरशाह प्रथम



मुगल सम्राट औरंगेब के बाद मुआजजम ने गद्दी संभाली उसने बहादुरशाह प्रथम के नाम से गद्दी पर बैठा ।

बहादुर शाह का शासन काल 1707 से 1712 था 

इसे शाह आलम प्रथम भी कहा जाता है।

इसे शाह ए बेखबर भी कहकर पुकारा जाता था।

जहांदारशाह  



इसका शासन काल 1712 से 1713 ई तक था।

जहांदारशाह एक अत्यंत अयोग्य शासक था ।वो तत्कालीन शक्तिशाली अमीर जुल्फिखार खान के सहयोग से शासक बना था। जहांदारशाह एक युद्ध में अपने भतीजे फारुखसियर द्वारा पराजित हुआ।

इसके बाद उसकी हत्या हो गई थी।

जहांदारशाह ने आमेर के राजपूत शासक जयसिंह द्वितीय को मिर्जा राजा सवाई की उपाधि और मालवा की सूबेदारी और मारवाड़  के शासक अजीत सिंह को महाराजा की उपाधि और गुजरात की सूबेदारी सौंपी।

जहांदारशाह ने हिंदुओ के प्रति मेल मिलाप की नीति का पालन किया। 

जयपुर शहर आमेर के शासक जयसिंह ने बसाया था।

इसी शहर को सवाई रामसिंह ने प्रिंस ऑफ़ वेल्स ,के  स्वागत के लिए 1876 ई० में  इसे गुलाबी रंग से रंगवा दिया।इसी के बाद से इसे गुलाबी शहर कहा जाने लगा।

जयसिंह ने खगोलीय से संबंधित एक सारणी भी तैयार कराया, जिसे जिज मुहम्मद शाही के नाम से जाना जाता है। 

जहांदारशाह को लंपट मूर्ख की उपाधि मिली थी।

फर्रुखसियर 



फर्रुखसियर का शासन काल 1713 ई० से 1719ई० तक रहा 

फर्रुखसियर सैय्यद बंधुओ के सहयोग से शासक बना।

फर्रुखसियर के शासन काल में जान सुरमन के नेतृत्व में अंग्रेजों का एक दल व्यापारिक रियायते प्राप्त करने के लिए आया था।

उस समय फर्रुखसियर फोड़े की बीमारी से पीड़ित था, जिसका इलाज अंग्रजों ने कर दिया इससे खुश होकर उसने 1717ई० में ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से एक फरमान जारी किया, ईस्ट इंडिया कंपनी के इतिहास का मेग्नाकार्टा कहा जाता है।

इसी प्रकार  फर्रुखसियर के प्रतिनिधि हुसैन अली खां और पेशवा बालाजी विश्वनाथ के बीच 1719 ई० एक संधि हुई जिसे रिचर्ड टेंपल ने मराठा के इतिहास का मेग्नाकार्टा कहा हैं।

फर्रुखसियर के शासन काल में ही सिख नेता बंदा बहादुर की हत्या हो गई थी।

बंदा बहादुर जिसे सच्चा पादशाह भी कहा जाता है, के नेतृत्व में सिख एक बार फिर से मुगलों के विरुद्ध विद्रोह पर उतारो हो गए थे।

बंदा बहादुर का मूल नाम लक्ष्मणदास था।

सैयद बंधुओ ने 1719 ई में मराठाओं के सहयोग से फर्रुखसियर को गद्दी से हटा कर उसकी हत्या कर दी। 

मुहम्मदशाह  



फर्रुखसियर के बाद मुहम्मदशाह गद्दी पर बैठा।इसका मूल नाम रोशन अख्तर था 

इसे मदिरा और सुंदर स्त्रीओ के प्रति अत्यधिक रुचि के कारण इसे मुहम्मदशाह रंगीला भी कहा जाने लगा ।

मुहम्मदशाह को संगीत से काफी लगाव था ।इसी के शासन काल में संगीत का सर्वाधिक विकास हुआ।

इसका शासन काल औरंजेब के बाद सबसे अधिक रहा इसका शासन काल 1719ई से 1748ई तक रहा।

सैय्यद बंधुओ का पतन भी इसी के शासन काल में हो गया 

मुहम्मदशाह के शासन काल में अनेक राजाओं ने अपनी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करनी शुरु कर दी।

सर्वप्रथम हैदराबाद ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।

इसी के साथ अन्य राज्यों ने भी अपनी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा प्रारम्भ कर दी, 

बंगाल - अलीवर्दी खा 

अवध - सआदत खा बुरहानुल मुल्क 

कर्नाटक - सादुतुल्ला खा 

नादिरशाह का भारत पर  आक्रमण  




नादिरशाह ने 13 फरवरी 1739 ई० को करनाल के युद्ध में मुहम्मदशाह की सेना बुरी तरह पराजित किया।

वो सिर्फ 57 दिनों तक दिल्ली में रहा  और 70 करोड़ रुपए लूट कर ले गया उसने 3 वर्ष तक अपने राज्य की जनता पर कोई कर नही लगाया।

वो अपने साथ शाहजहां का मयूर सिंहासन तख्त ए ताउस और कोहिनूर हीरा भी लूट कर ले गया।

उसे फारस के नेपोलियन के नाम से जाना जाता हैं। 

अहमदशाह 



मुहम्मदशाह की मृत्यु के बाद अहमदशाह शासक बना।

इसका वजीर सफदजंग था  

उसके शासन की संपूर्ण प्रशासन को राजमाता ऊधम बाई और जावेद खा के हाथो में थी। 

अहमदशाह का शासन काल 1748ई० से 1754ई० तक रहा  




Read more ...... 

Geography in English 



Comments

Popular posts from this blog

Jarib , pictures, photo,जरीब का चित्र, chain survey,Part3 जरीब सर्वेक्षण chain survey

  जरीब सर्वेक्षण (Chain Survey) | सिद्धांत, प्रकार, फीता और उपकरण  Introduction सर्वेक्षण (Surveying) सिविल इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें क्षेत्र की दूरी, दिशा और सीमाओं को मापा जाता है। जरीब सर्वेक्षण (Chain Survey) सबसे सरल और प्राचीन तकनीक है, जिसमें जरीब या फीता का उपयोग किया जाता है।  जरीब (Chain) क्या है? जरीब एक यांत्रिक उपकरण है जिसका उपयोग रेखीय दूरी नापने (Linear Measurement) के लिए किया जाता है। यह जस्तीकृत मृदु इस्पात की कड़ियों से बनी होती है। दोनों सिरों पर पीतल के हत्थे (Handles) लगे होते हैं। यह छोटे और समतल क्षेत्रों के सर्वेक्षण के लिए उपयुक्त है।  जरीब को चेन सर्वे (Chain Survey) में मुख्य उपकरण माना जाता है।  फीता (Tape) क्या है? फीता (Tape) भी दूरी मापने का उपकरण है लेकिन इसमें कड़ियाँ नहीं होतीं। यह जरीब से हल्का और अधिक शुद्ध (Accurate) होता है। इसे कई प्रकार के पदार्थों से बनाया जाता है: सूती फीता (Cotton Tape) मेटलिक फीता (Metallic Tape) इस्पाती फीता (Steel Tape) इन्वार फीता (Invar Tape) ...

Surveying in Civil Engineering: सर्वेक्षण क्या है? Types, Principles & Uses

सिविल इंजीनियरिंग में सर्वेक्षण (Surveying in Civil Engineering) सर्वेक्षण क्या है? (What is Surveying?) Surveying in Civil Engineering सिविल इंजीनियरिंग की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसमें भूमि पर स्थित विभिन्न बिंदुओं की दूरी, कोण, ऊँचाई और स्थिति का मापन करके नक्शा (Map) तथा निर्माण कार्य के लिए आवश्यक डेटा तैयार किया जाता है। Surveying का उपयोग सड़क, पुल, रेलवे, नहर, भवन और अन्य निर्माण परियोजनाओं में किया जाता है। सर्वेक्षण का उद्देश्य (Purpose of Surveying) सटीक नक्शा और योजना बनाना – टोपोग्राफिकल और कैडस्ट्रल नक्शा तैयार करना। निर्माण स्थल का चयन – सड़क, रेलवे, पाइपलाइन और सीवर लाइन के लिए उचित स्थल चुनना। बिंदुओं की स्थिति ज्ञात करना – प्राकृतिक और कृत्रिम बिंदुओं की स्थिति मापना। ऊंचाई और गहराई मापन – भूमि की स्थलाकृति और ऊंचाई निर्धारण। निर्माण कार्यों के लिए लेआउट बनाना – भवन, पुल, नहर आदि के लिए मार्किंग। भूमि की सीमाओं का निर्धारण – संपत्ति और कानूनी उद्देश्यों के लिए। मिट्टी की कटाई और भराई का परिमाण – निर्माण में आवश्यक माप। सर्वेक्षण का वर्गीक...

Contour (कॉन्टूर) क्या है? | Types, Uses, Importance of Contour in Surveying – Civil Engineering Notes in Hindi

  Contour क्या होता है कॉनटूर (Contour) शब्द का प्रयोग सर्वेक्षण (Surveying) में बहुत आम है। यह शब्द जमीन की ऊँचाई और ढाल (slope) को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कॉनटूर लाइनों की मदद से हम किसी इलाके की सतह (surface) को 3-D रूप में समझ सकते हैं — यानी बिना उस जगह पर जाए यह पता लगाया जा सकता है कि जमीन ऊँची है या नीची।   कॉनटूर की परिभाषा (Definition of Contour) कॉनटूर (Contour) एक काल्पनिक रेखा (Imaginary Line) होती है जो उन सभी बिंदुओं (points) को जोड़ती है जिनकी ऊँचाई (elevation) समुद्र तल (mean sea level) से बराबर होती है । उदाहरण: अगर किसी क्षेत्र में 100 मीटर ऊँचाई वाले सारे बिंदुओं को जोड़ दिया जाए, तो वह रेखा 100 मीटर की कॉनटूर लाइन कहलाएगी। इसका मतलब यह कि उस लाइन पर आने वाले हर बिंदु की ऊँचाई 100 मीटर है। कॉनटूर का उद्देश्य (Purpose of Contour Map) कॉनटूर लाइनों का मुख्य उद्देश्य है — जमीन के प्राकृतिक आकार (shape) और ढाल को दिखाना ताकि इंजीनियर और सर्वेयर उस क्षेत्र की सही योजना बना सकें। मुख्य उद्देश्य: जमीन के आकार और ढाल को समझना। ...