Skip to main content

Chaining on sloping ground

  Chaining on Sloping Ground (Simple Notes) When measuring distances on a hill or slope, we always need to find the flat horizontal distance , not the actual sloped ground distance. There are two main ways to do this: 1. Direct Method (Stepping Method) In this method, you measure the flat horizontal distance directly on the field by creating small, flat steps. Best For: Short, bumpy, irregular, or gentle slopes. How it works (Step-by-Step): Start: The Follower holds the 0-end of the tape flat on the starting ground point A. Stretch: The Leader pulls a short, comfortable length of the tape forward and lifts it up until it looks perfectly flat and straight by eye judgment. Drop: Because the front end of the tape is hanging in the air, the Leader drops a plumb-bob (a weight on a string) down to find the exact vertical point on the ground. Mark & Repeat: They stick an arrow into that ground point. The Follower moves to this new arrow, and they repeat the steps all the way u...

Beam steel structures Part2

 वेब व्याकुँचन( Web Buckling) 

 वेब बकलिंग ट्रांसवर्सली लागू होने वाले केंद्रित बलों से उत्पन्न होते हैं। ... वेब का बकलिंग तब होता है जब वेब बहुत पतला होता है और फ्लेंज से स्थानांतरित किए जा रहे अनुप्रस्थ बल को वहन नहीं कर पाता है। इसमें वितरण कोण 45° लिया जाता है।

Fwb= (b1+n1)tw.fc 

  Fwb=  वेब व्याकुँचन सामर्थ्य 

      b1= धारण लम्बाई 

      tw= वेब मोटाई 

       fc= अनुमेय सम्पीडन प्रतिबल 

       n1= काट के मध्य पर 45° वितरण रेखा 


वेब विकलांगता ( Web Crippling)

जब धरन में बिंदु भार लगा हो तो बिंदु भार के कारण धरन की वेब में किसी बिंदु पर धरन के नीचे समुचित धारण क्षेत्रफल न होने के कारण पंगु होने की संभावना होती है इसे ही वेब विकलांगता अथवा वेब का पंगु होना कहा जाता है। यहां फ्लेंज के ऊपरी रेशे से भार के लिए वितरण कोण 30° माना जाता है। 

वेब विकलांगता सामर्थ्य आलंब पर नियमानुसार ज्ञात करेंगे।

Fcrip = (b1+n2)tw fyw 

     b1= धारण लम्बाई 

     n2= फ्लैंज से वितरण की लम्बाई 

      tw,= वेब की मोटाई 

      fyw= वेब की अभिकाल्पन पराभव सामर्थ्य 



संघटित धरन की चरण बद्ध अभिकल्पन 

चरण 1 

धरन पर आने वाले संभावित भार का अनुमान करना।

चरण 2 

अधिकतम बंकन आघूर्ण और अधिकतम कर्तन बल ज्ञात करना ।

           Zreq = M/σbc 


चरण 3 

इस्पात तालिका की मदद से ऐसे काट का चयन करें जिसका आकृति मापांक अधिकतम हो ।बाकी आवरण पट्टिका द्वारा आवश्यक आकृति मापांक दिया जायेगा।

चरण 4 

निम्न समीकरण से आवरण पट्टिका की आवश्यक चौड़ाई और मोटाई की गणना की जायेगी। 

                       Aa= Btfp 

चरण 5 

लगाया गया अगणित आकृति मापांक का मान आवश्यक आकृति मापांक से अधिक होना चाहिए ।

चरण 6 

चयनित खण्ड का फ्लैंज आवरण पट्टिका से जोड़ और आवरण पट्टिका की कटौती करना ।

चरण 7 

तनन और संपीडन के अधिकतम प्रतिबलो की गणना करना। तनन में बंकन प्रतिबल की जांच करना।

चरण 8 

अपरुपण कर्तन की गणना करना तथा इसका मान अनुमेय कर्तन प्रतिबल 0.4fy से कम होना चाहिए।

चरण9 

धरन की विकलांगता में आवश्यकतानुसार जांच करना।

शहतीर / धन्नी / कडी (Purlin) 

शहतीर एक प्रकार की धरने हैं को ढालू छत व्यवस्था में प्रयोग की जाती है।ये मुख्य राफ्टर के ऊपर नत अवस्था में ट्रस में धारित होती है। छत कैंची के शीर्ष कार्ड में बंकन रोकने के लिए सैद्धान्तिक रूप से पर्लिन को केवल पैनल बिन्दु पर स्थापित किया जाना चाहिए है। बडे ट्रस मे यथा सम्भव पर्लिन को नजदीक रखना अधिक मित्तव्ययी होगा। भारत मे जहां एस्बेस्टस चादरे प्रयुक्त होती है। 

AC चादरो मे अनुदैर्ध्य चढ़ाव 150 mm से कम नहीं देते। पर्लिन अन्तराल का समन्वय चादर की लम्बाई के साथ इस तरह लिया जाता है कि अनुदैर्ध्य पर्लिन पर आये जिसपर वो सीधे जुड़े हो। पर्लिन का अंतराल इस प्रकार तय किया जाए की चादर की कटाई न हो। व्याहारिक रूप से पर्लिन का अंतराल 1.35 m से 1.4 m होना चाहिए।

सामान्यत: पर्लिन 0.6m से लगभग 2 m तक के अंतराल पर रखी जाती है और इनकी अधिकतम अपेक्षित गहराई से विस्तृति का अनुपात लगभग 1/24 हैं ।

शुद्धालम्बित पर्लिन में अधिकतम बंकन आघूर्ण (wl)^2/8 होगा 

सतत धरन के लिए wl)^2/10 होगा। 





 Read more 

GK 

साइंस , अविष्कार और अविष्कारक

विज्ञान की प्रमुख शाखाएं


Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Jarib , pictures, photo,जरीब का चित्र, chain survey,Part3 जरीब सर्वेक्षण chain survey

  जरीब सर्वेक्षण (Chain Survey) | सिद्धांत, प्रकार, फीता और उपकरण  Introduction सर्वेक्षण (Surveying) सिविल इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसमें क्षेत्र की दूरी, दिशा और सीमाओं को मापा जाता है। जरीब सर्वेक्षण (Chain Survey) सबसे सरल और प्राचीन तकनीक है, जिसमें जरीब या फीता का उपयोग किया जाता है।  जरीब (Chain) क्या है? जरीब एक यांत्रिक उपकरण है जिसका उपयोग रेखीय दूरी नापने (Linear Measurement) के लिए किया जाता है। यह जस्तीकृत मृदु इस्पात की कड़ियों से बनी होती है। दोनों सिरों पर पीतल के हत्थे (Handles) लगे होते हैं। यह छोटे और समतल क्षेत्रों के सर्वेक्षण के लिए उपयुक्त है।  जरीब को चेन सर्वे (Chain Survey) में मुख्य उपकरण माना जाता है।  फीता (Tape) क्या है? फीता (Tape) भी दूरी मापने का उपकरण है लेकिन इसमें कड़ियाँ नहीं होतीं। यह जरीब से हल्का और अधिक शुद्ध (Accurate) होता है। इसे कई प्रकार के पदार्थों से बनाया जाता है: सूती फीता (Cotton Tape) मेटलिक फीता (Metallic Tape) इस्पाती फीता (Steel Tape) इन्वार फीता (Invar Tape) ...

Surveying in Civil Engineering: सर्वेक्षण क्या है? Types, Principles & Uses

सिविल इंजीनियरिंग में सर्वेक्षण (Surveying in Civil Engineering) सर्वेक्षण क्या है? (What is Surveying?) Surveying in Civil Engineering सिविल इंजीनियरिंग की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जिसमें भूमि पर स्थित विभिन्न बिंदुओं की दूरी, कोण, ऊँचाई और स्थिति का मापन करके नक्शा (Map) तथा निर्माण कार्य के लिए आवश्यक डेटा तैयार किया जाता है। Surveying का उपयोग सड़क, पुल, रेलवे, नहर, भवन और अन्य निर्माण परियोजनाओं में किया जाता है। सर्वेक्षण का उद्देश्य (Purpose of Surveying) सटीक नक्शा और योजना बनाना – टोपोग्राफिकल और कैडस्ट्रल नक्शा तैयार करना। निर्माण स्थल का चयन – सड़क, रेलवे, पाइपलाइन और सीवर लाइन के लिए उचित स्थल चुनना। बिंदुओं की स्थिति ज्ञात करना – प्राकृतिक और कृत्रिम बिंदुओं की स्थिति मापना। ऊंचाई और गहराई मापन – भूमि की स्थलाकृति और ऊंचाई निर्धारण। निर्माण कार्यों के लिए लेआउट बनाना – भवन, पुल, नहर आदि के लिए मार्किंग। भूमि की सीमाओं का निर्धारण – संपत्ति और कानूनी उद्देश्यों के लिए। मिट्टी की कटाई और भराई का परिमाण – निर्माण में आवश्यक माप। सर्वेक्षण का वर्गीक...

Contour (कॉन्टूर) क्या है? | Types, Uses, Importance of Contour in Surveying – Civil Engineering Notes in Hindi

  Contour क्या होता है कॉनटूर (Contour) शब्द का प्रयोग सर्वेक्षण (Surveying) में बहुत आम है। यह शब्द जमीन की ऊँचाई और ढाल (slope) को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कॉनटूर लाइनों की मदद से हम किसी इलाके की सतह (surface) को 3-D रूप में समझ सकते हैं — यानी बिना उस जगह पर जाए यह पता लगाया जा सकता है कि जमीन ऊँची है या नीची।   कॉनटूर की परिभाषा (Definition of Contour) कॉनटूर (Contour) एक काल्पनिक रेखा (Imaginary Line) होती है जो उन सभी बिंदुओं (points) को जोड़ती है जिनकी ऊँचाई (elevation) समुद्र तल (mean sea level) से बराबर होती है । उदाहरण: अगर किसी क्षेत्र में 100 मीटर ऊँचाई वाले सारे बिंदुओं को जोड़ दिया जाए, तो वह रेखा 100 मीटर की कॉनटूर लाइन कहलाएगी। इसका मतलब यह कि उस लाइन पर आने वाले हर बिंदु की ऊँचाई 100 मीटर है। कॉनटूर का उद्देश्य (Purpose of Contour Map) कॉनटूर लाइनों का मुख्य उद्देश्य है — जमीन के प्राकृतिक आकार (shape) और ढाल को दिखाना ताकि इंजीनियर और सर्वेयर उस क्षेत्र की सही योजना बना सकें। मुख्य उद्देश्य: जमीन के आकार और ढाल को समझना। ...