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Showing posts from October, 2025

शैक्षिक नवाचार का महत्व,क्रियात्मक शोध (Action Research),शैक्षिक नवाचार क्या होता है?

  क्रियात्मक शोध (Action Research) क्या है? क्रियात्मक शोध वह शोध है जो शिक्षक खुद अपने काम को सुधारने के लिए करता है। यानि — जब कोई शिक्षक यह देखता है कि कक्षा में कोई समस्या है (जैसे बच्चे ध्यान नहीं देते, या गणित में कमजोर हैं), तो वह उस समस्या को हल करने के लिए छोटा-सा प्रयोग करता है — यही क्रियात्मक शोध कहलाता है। 📘 क्रियात्मक शोध के चार क्षेत्र (चार मुख्य क्षेत्र) शिक्षण प्रक्रिया (Teaching Process) 👉 इसमें शिक्षक अपने पढ़ाने के तरीकों को सुधारने की कोशिश करता है। उदाहरण: बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं देते → नई रोचक विधि अपनाई। गणित को आसान बनाने के लिए चार्ट और मॉडल का प्रयोग किया। विद्यालय प्रबंधन (School Management) 👉 इसमें स्कूल की व्यवस्था और अनुशासन से जुड़ी समस्याओं पर शोध किया जाता है। उदाहरण: स्कूल में देर से आने वाले बच्चों की संख्या कैसे घटाई जाए। सफाई और अनुशासन बनाए रखने के तरीके। पाठ्यक्रम और मूल्यांकन (Curriculum and Evaluation) 👉 इसमें पाठ्यक्रम (syllabus) और परीक्षा या मूल्यांकन प्रणाली को बेहतर बनाने पर काम होता...

Shear Strength of Soil, Mohr Coulomb Theory, Terzaghi Modified Coulomb Law, Angle of Repose, Soil Mechanics Notes, Foundation Design, Slope Stability, Retaining Wall Pressure, Civil Engineering Basics

  Shear Strength of Soil – Definition, Components, Formula & Importance in Civil Engineering 🔹 Introduction: What is Shear Strength of Soil? Shear Strength refers to the resistance of soil against sliding or failure when subjected to stress or load. In simple terms — When load or pressure is applied on soil, it either remains stable or fails (slips) . The ability of soil to resist slipping or deformation is called its Shear Strength . 🧱 Example: Dry sandy soil slips easily when stepped on — meaning low shear strength. Moist or cohesive clayey soil sticks together — meaning higher shear strength. ⚙️ Main Components of Shear Strength Component Meaning Dominant in Soil Type Cohesion (c) The binding force between soil particles Clayey soil Internal Friction (φ) Resistance due to interparticle friction Sandy soil 📘 Formula (Mohr–Coulomb Equation): τ = c + σ tan ⁡ ϕ \tau = c + \sigma \tan \phi τ = c + σ tan ϕ Where: τ (tau) = Shear strength of soil ...

Soil Mechanics in Civil Engineering | Shear Strength, Angle of Repose, Coulomb’s Law Explained in Hindi

  Shear Strength of Soil क्या होती है?  👉 Shear Strength (कतरनी शक्ति) का मतलब होता है — मिट्टी की वह क्षमता जिससे वह फिसलने (Slip) या टूटने (Failure) से खुद को रोकती है। यानि जब मिट्टी पर कोई भार (load) या दबाव (pressure) आता है, तो वह या तो टिके रहती है (Stable) या खिसक जाती है (Failure)। मिट्टी के खिसकने से बचने की क्षमता ही उसकी Shear Strength कहलाती है। उदाहरण से समझो: मान लो दो ढेर मिट्टी के हैं — सूखी रेतीली मिट्टी गीली चिकनी मिट्टी अगर आप सूखी रेतीली मिट्टी पर पैर रखो तो वो फौरन फिसल जाती है — यानी उसकी shear strength कम है। लेकिन अगर वही मिट्टी थोड़ी गीली हो जाए तो थोड़ी चिपकने लगती है — यानी उसकी shear strength बढ़ जाती है । मिट्टी में Shear Strength कहाँ काम आती है: नींव (Foundation) को भार सहने में ढलानों (Slopes) या पहाड़ियों को फिसलने से रोकने में Retaining wall के पीछे मिट्टी को थामे रखने में Roads, embankments, dams आदि के डिज़ाइन में Shear Strength किन बातों पर निर्भर करती है: Cohesion (चिपकने की शक्ति) ...