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Earth Pressure in Civil Engineering – Definition, Types & Importance in Hindi

 Heaving (हीविंग)

Heaving का मतलब होता है मिट्टी का ऊपर की ओर उठ जाना।
जब नीचे की मिट्टी में पानी का दबाव (uplift pressure) बढ़ जाता है या मिट्टी सूज जाती है (expand हो जाती है), तब मिट्टी ऊपर उठ जाती है — इसे Heaving कहते हैं।

सरल शब्दों में:
जब नीचे से पानी का दबाव या मिट्टी का फैलाव बढ़ने से जमीन ऊपर उठ जाए, तो उसे Heaving कहते हैं।

Heaving के मुख्य कारण:नीचे की मिट्टी में पानी का दबाव बढ़ जाना।

Expansive soil (जैसे black cotton soil) में पानी जाने से मिट्टी का फूल जाना।

Excavation (खुदाई) करते समय नीचे की मिट्टी का balance बिगड़ना।

उदाहरण:Basement या foundation की खुदाई के बाद नीचे की मिट्टी का ऊपर उठ जाना।

बारिश के बाद black cotton soil का उभर जाना।

Exam के लिए short definition:

Heaving वह स्थिति है जब मिट्टी के नीचे से पानी का दबाव या फैलाव बढ़ने के कारण मिट्टी ऊपर की ओर उठ जाती है।

याद रखने योग्य अंतर:

Settlement = मिट्टी नीचे बैठना।

Heaving = मिट्टी ऊपर उठना 

क्रीप (Creep) क्या है?

क्रीप एक धीरे-धीरे होने वाला स्थायी विकृति (Permanent Deformation) है,

जो तब होती है जब किसी पदार्थ (Material) पर लगातार एक समान भार (Constant Load)

लंबे समय तक लगाया जाता है।

सरल परिभाषा:

जब किसी पदार्थ पर एक जैसा भार लंबे समय तक लगाया जाता है

और समय के साथ उसकी आकार या लंबाई बदलने लगती है,

तो इस प्रक्रिया को क्रीप (Creep) कहा जाता है।

 उदाहरण:

मान लो तुमने लोहे की तार पर एक भार टाँग दिया।

पहले तार थोड़ा खिंच गया — ये इलास्टिक परिवर्तन (Elastic Deformation) है।

लेकिन अगर वही भार लंबे समय तक टंगा रहे,

तो तार और थोड़ा लम्बा हो जाएगा —

ये जो समय के साथ-साथ धीरे-धीरे बदलाव होता है,

वही क्रीप (Creep) कहलाता है।

 क्रीप कब होता है:

जब ऊँचे तापमान (High Temperature) पर काम हो रहा हो।

जब एक ही भार लंबे समय तक लगा रहे।

 क्रीप के तीन चरण (Stages of Creep):

प्रारंभिक क्रीप (Primary Creep):

शुरुआत में विकृति (deformation) की गति ज़्यादा होती है,

फिर धीरे-धीरे कम हो जाती है।

माध्य क्रीप (Secondary Creep):

इस चरण में विकृति की गति लगभग स्थिर रहती है,

यह सबसे स्थिर और लंबा चरण होता है।

अंतिम क्रीप (Tertiary Creep):

विकृति की गति बहुत तेज़ हो जाती है,

अंत में पदार्थ टूट जाता है।

🧱 सिविल इंजीनियरिंग में उदाहरण:


जब कंक्रीट की बीम (Concrete Beam) पर कोई स्थायी भार (Permanent Load)लंबे समय तक रहता है,तो बीम धीरे-धीरे और नीचे झुक जाती है —इसे कंक्रीट का क्रीप (Creep of Concrete) कहते हैं।

 परीक्षा-योग्य परिभाषा:

क्रीप वह धीरे-धीरे होने वाली स्थायी विकृति है,

जो किसी पदार्थ में लंबे समय तक एक समान भार के कारण उत्पन्न होती है। 

Plastic Flow (प्लास्टिक फ्लो) क्या है?

jab kisi material (जैसे मिट्टी, धातु या कंक्रीट) par ज्यादा भार (stress) lagta hai,aur wo अपना आकार स्थायी रूप से बदल लेता है,to is process ko Plastic Flow (प्लास्टिक प्रवाह) kehte hain.

सरल परिभाषा:

जब किसी पदार्थ पर इतना भार लगाया जाता है कि वह स्थायी रूप से बहने या रूप बदलने लगे,

तो इसे प्लास्टिक फ्लो (Plastic Flow) कहा जाता है।

आसान शब्दों में समझो:

Jab stress elastic limit (वह सीमा जहाँ तक चीज़ वापस अपने आकार में आ सकती है)

se ज्यादा ho jata hai,

tab material वापस नहीं आता, balki shape change kar leta hai.

Ye permanent shape change plastic flow kehlata hai.

उदाहरण:

Jab metal wire par zyada load lagate ho aur wo stretch hokar patla ho jata hai,

to ye plastic flow hai.

Mitti (clay) jab zyada load me hoti hai, to wo dhire-dhire side me failne lagti hai,

ye bhi plastic flow hai.

Elastic aur Plastic Flow me antar:

Comparison Elastic Flow (लोचदार प्रवाह) Plastic Flow (प्लास्टिक प्रवाह)

भार हटाने पर आकार वापस आ जाता है आकार वापस नहीं आता

परिवर्तन अस्थायी (Temporary) स्थायी (Permanent)

सीमा इलास्टिक लिमिट के अंदर इलास्टिक लिमिट के बाद

उदाहरण रबर का खिंचना मिट्टी का बहना या धातु का मुड़ना


Civil Engineering me example:

Jab foundation ke neeche ki mitti par zyada load padta hai,

to mitti side me failne lagti hai,

isse Plastic Flow of Soil kehte hain.

Ye kabhi-kabhi settlement aur failure ka karan bhi banta hai.


Short exam definition:


Plastic Flow: वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ पर अधिक भार लगने से

वह स्थायी रूप से अपना आकार बदल देता है और वापस नहीं आता। 

Lateral Movement (पार्श्व गति) क्या है?

Lateral Movement ka matlab hota hai —
jab soil, foundation, ya structure apni sideways direction (side me) move karta hai,
matlab सीधे ऊपर या नीचे नहीं, बल्कि पार्श्व (horizontal) दिशा में खिसकना


सरल परिभाषा:

जब कोई पदार्थ या निर्माण तत्व apni original position se side me shift ho jata hai,
तो इसे Lateral Movement (पार्श्व गति) कहते हैं।


आसान शब्दों में समझो:

  • Soil ya structure jab horizontal direction me खिसकता है

  • Ye movement zyada tar load, water pressure, ya slope ke karan hoti hai.


उदाहरण:

  1. Retaining wall par soil ka pressure padta hai,
    to wall thodi side me dhak jati hai — ye lateral movement hai.

  2. Slope ke soil me heavy rain ke baad soil side me slide kar jata hai — lateral movement.

  3. Foundation par uneven load ke wajah se foundation side me shift ho jata hai — ye bhi lateral movement hai.


Civil Engineering me importance:

  • Lateral movement se retaining walls fail ho sakte hain.

  • Soil ya structure ka stability problem ho sakta hai.

  • Iska study karna engineers ke liye bahut important hai,
    khaaskar earth pressure aur slope stability ke liye.


Short exam definition:

Lateral Movement: जब कोई निर्माण तत्व या मिट्टी sideways (पार्श्व दिशा में) अपनी original position से खिसक जाए,
तो इसे पार्श्व गति (Lateral Movement) कहते हैं।

Lateral Movement (पार्श्व गति) क्या है?

Lateral Movement ka matlab hota hai —
jab soil, foundation, ya structure apni sideways direction (side me) move karta hai,
matlab सीधे ऊपर या नीचे नहीं, बल्कि पार्श्व (horizontal) दिशा में खिसकना


सरल परिभाषा:

जब कोई पदार्थ या निर्माण तत्व apni original position se side me shift ho jata hai,
तो इसे Lateral Movement (पार्श्व गति) कहते हैं।


आसान शब्दों में समझो:

  • Soil ya structure jab horizontal direction me खिसकता है

  • Ye movement zyada tar load, water pressure, ya slope ke karan hoti hai.


उदाहरण:

  1. Retaining wall par soil ka pressure padta hai,
    to wall thodi side me dhak jati hai — ye lateral movement hai.

  2. Slope ke soil me heavy rain ke baad soil side me slide kar jata hai — lateral movement.

  3. Foundation par uneven load ke wajah se foundation side me shift ho jata hai — ye bhi lateral movement hai.


Civil Engineering me importance:

  • Lateral movement se retaining walls fail ho sakte hain.

  • Soil ya structure ka stability problem ho sakta hai.

  • Iska study karna engineers ke liye bahut important hai,
    khaaskar earth pressure aur slope stability ke liye.


Short exam definition:

Lateral Movement: जब कोई निर्माण तत्व या मिट्टी sideways (पार्श्व दिशा में) अपनी original position से खिसक जाए,
तो इसे पार्श्व गति (Lateral Movement) कहते हैं।

Earth Pressure (पृथ्वी का दबाव) क्या है?


परिभाषा:


मिट्टी (soil) जब wall, foundation या किसी structure पर दबाव डालती है,


उसे Earth Pressure कहते हैं।


आसान शब्दों में:


Soil apni weight aur load ke karan structure par force dalti hai.


Ye force sideways (horizontal) ya neeche (vertical) dono directions me ho sakti hai.


Earth Pressure के प्रकार:


Active Earth Pressure (सक्रिय दबाव)


Wall soil se door move kare → soil pressure kam hota hai


Passive Earth Pressure (निष्क्रिय दबाव)


Wall soil ki taraf push kare → soil pressure zyada hota hai


At-Rest Earth Pressure (स्थिर दबाव)


Wall move nahi kare → soil pressure normal hota hai


Civil Engineering me importance:


Retaining wall, basement, foundation design me earth pressure bahut important hai


Agar sahi se calculate na ho, to wall tilt ya fail ho sakta hai


Short exam definition:


मिट्टी द्वारा किसी wall या structure पर डाले जाने वाला दबाव,

जिसे उसकी weight और position तय करती है, Earth Pressure कहते हैं।

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